राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने सोमवार (20 अप्रैल, 2026) को संस्कृत को भारत की विविध भाषाई परंपराओं के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी और देश की सभ्यतागत विरासत का प्रवेश द्वार बताते हुए देश भर में प्राचीन भाषा के उपयोग का विस्तार करने का आह्वान किया। श्री भागवत नई दिल्ली में आरएसएस विंग संस्कृति भारती के नवनिर्मित केंद्रीय कार्यालय के उद्घाटन पर बोल रहे थे, जहां उन्होंने संगठन से भाषा को बढ़ावा देने के लिए ‘ऐसे महान प्रयास’ करने का आह्वान किया ताकि भारत का हर व्यक्ति इसमें बातचीत कर सके।